Thu. Jan 20th, 2022
आलू की खेती कैसे करें

 

आलू का परिचय:-

हेल्लो दोस्तों आज हम आपको आलू की खेती कैसे करें के बारे में विस्तार से जानकारी देने की कोशिश करेंगे जिससे आप भी अपने खेत या फिर अपने घर पर आलू की खेती आसानी से कर पाओंगे जैसे कि आप सभी को पता होगा कि आलू को सब्जियों का राजा भी कहा जाता हैं देश मे शायद ही कोई ऐसा घर या होटल होगा जहाँ पर आलू का प्रयोग ना दिखे

आलू एक अर्द्धसडनशील सब्ज़ी वाली फसल हैं आलू का प्रयोग हम मसालेदार सब्जियों, पकौड़े, चाट, चिप्स- कुरकुरे और भुजिया आदि स्वादिष्ट पकवान बाने के लिए हम आलू का हर जगह प्रयोग करते हैं आलू में प्रोटीन, स्टार्च, विटामिन सी और अमीनो अम्ल ट्रिप्टोफेन, ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन जैसे आदि ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं आलू में मुख्य रूप से 80-82 प्रतिशत पानी होता है और 14 प्रतिशत स्टार्च, 2 प्रतिशत चीनी, 2 प्रतिशत प्रोटीन तथा 1 प्रतिशत खनिज लवण होते हैं। वसा 0.1 प्रतिशत तथा थोड़ी मात्रा में विटामिन्स भी होते हैं।
जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं

आलू की खेती कैसे करें:-

आलू की खेती रबी मौसम या शरदऋतु में की जाती है धान की कटाई के साथ ही ज्यादातर क्षेत्रों में आलू की बुवाई शुरू हो जाती है आलू की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका को माना जाता है, लेकिन भारतवर्ष में आलू प्रथम बार सत्रहवीं शताब्दी में यूरोप से आया चावल, गेहूँ, गन्ना के बाद क्षेत्रफल में आलू का चौथा स्थान है। आलू एक ऐसी फसल है जिससे प्रति इकाई क्षेत्रफल में अन्य फसलों जैसे गेहूँ, धान एवं मूँगफली की अपेक्षा अधिक उत्पादन मिलता है तथा प्रति हेक्टर आय भी अधिक मिलती है।

लेकिन कई बार किसान मंहगा खाद बीज तो डालता है, खेती में मेहनत भी करता है, लेकिन अच्छी उपज नहीं मिल पाती। ऐसे में किसान शुरू से ही कुछ बातों का ध्यान रखकर आलू की खेती से बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। आलू की खेती की शुरूआत खेत की तैयारी से लेकर बीज के चयन से होती है इसके बाद सबसे जरूरी है, मिट्टी की जांच करा लें, अगर मिट्टी की जांच नहीं हो पायी है तो देखना चाहिए कि खेती की मिट्टी बलुई दोमट होनी चाहिए और पीएच की जांच आसानी से हो जाती है

खेत का रकबा निकाले सिर्फ एक मिनट में

अगर मिट्टी का पीएच मान 06 से 08 के बीच में है और उचित जल निकास वाली मिट्टी है पानी अच्छी तरह से खेत से निकल जा रहा है तो आलू की खेती के लिए खेत सही है आलू ही नहीं किसी भी खेती की शुरूआत करते समय ये देखना चाहिए की खेत की मिट्टी का स्वास्थ्य कैसा है। इसलिए ये देखना होगा कि खेत में ऑर्गेनिक कॉर्बन यानी की जीवांश की मात्रा कितनी है।

खेत की मिट्टी में जैविक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद या मुर्गी की खाद डालेंगे तो आपके खेत का आलू हरा नहीं होगा। मीठा नहीं होगा, उत्पादन अच्छा होगा और कीट और बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी ज्यादा रहेगी। इसलिए मिट्टी में जितना हो सके जैव उर्वरकों का प्रयोग करें। खर-पतवार से मुक्ति के लिए जुताई से एक सप्ताह पूर्व राउंड अप नामक तृणनाशी दवा जिसमें ग्लायफोसेट नामक रसायन (42 प्रतिशत) पाया जाता है उसका प्रति लीटर पानी में 2.5 (अढ़ाई) मिली लीटर दवा का घोल बनाकर छिड़काव करने से फसल लगने के बाद खर-पतवार में काफी कमी हो जाती है।

आलू की खेती में खाद:-

आलू बहुत खाद खाने वाली फसल है यह मिट्टी के ऊपरी सतह से ही भोजन प्राप्त करती है इसलिए इसे प्रचुर मात्रा में जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है। यदि हरी खाद का प्रयोग न किया हो तो 15-30 टन प्रति है सड़ी गोबर की खाद प्रयोग करने से जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है जो कन्दों की पैदावार बढाने में सहायक होती है।

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गोबर की सड़ी खाद 50-60 टन 20 किलो ग्राम नीम की खली 20 किलो ग्राम अरंडी की खली इन सब खादों को अच्छी तरह से मिलाकर प्रति एकड़ भूमि में समान मात्रा में छिड़काव कर जुताई कर खेत तैयार कर बुवाई करे जब फसल 25 – 30 दिन की हो जाए तब उसमे 10 ली. गौमूत्र में नीम का काड़ा मिलाकर अच्छी प्रकार से मिश्रण तैयार कर फसल में तर-बतर कर छिड़काव करें और हर 15-20 दिन के अंतर से दूसरा व तीसरा छिड़काव करें

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