करेला की खेती

  •     करेला की खेती

 

करेला बहुत ही महत्त्वपूर्ण फसल है ,और
                    करेला एक ऐसी फसल है ,जिसका भाव बाजार में
सबसे कम गिरता है ,यानी कि

  1.                  अगर जो किसान
    भाई करेले की खेती करते हैं ,उनको हमेशा
    अच्छे पैसे मिलते हैं ,ऐसे बहुत कम मौके
    होते हैं ,जब करेले का भाव गिरे तो यह एक
                       
    ऐसी खेती है ,जो आपकी सोर खेती है ,जहां
    आपको पैसा अच्छा मिलना ही मिलना है करेले
    की खेती में भी वही बात आती है ,एक तो सबसे
    पहले खेत का चुनाव खेत का चुनाव आपको इस
    प्रकार का करना है?
  2.           जिसके अंदर आपका
    ड्रेनेज की समस्या अच्छा प्रबंधन हो यानी
    कि एक्स्ट्रा पानी हो उसको निकालने की
    निकासी बहुत अच्छी होनी चाहिए क्योंकि
    जितनी भी सब्जी वाली फसलें हैं ,ये अधिक
    पानी को बर्दाश्त नहीं कर पाती पानी चाहिए
    लेकिन सही मात्रा में चाहिए ज्यादा पानीइनको नुकसान पहुंचाता है ,और करेले को
    खासकर तो मैं सबसे पहले तो ये कहना
    चाहूंगा कि खेत का इस प्रकार का चुनाव ना
    है ,जहां पर जल निकाशी अच्छी हो मिट्टी
    उपजाऊ हो मोमट मिची इसके लिए सर्वश्रेष्ठ
    रहती है ,और जिस मिट्टी में जीवांश तत्व की
    मात्रा ज्यादा है वो इस सब्जी के लिए बहुत
    ही महत्त्वपूर्ण है लेकिन जहां पर जीवांश
    तत्व की मात्रा कुछ कम है !तो मैं उन किसान
    भाइयों को बताना चाहूंगा कि वो देसी खाद
    का ज्यादा से ज्यादा मात्रा में प्रयोग
    करें !चाहे वो वर्मी कंपोस्ट हो चाहे वो
    फार्म यार्ड मैनर हो चाहे बायोगैस सेलरी
    हो !
  3.         जितनी ज्यादा खाद का प्रयोग करोगे उतने
    ही आपको करेले से अच्छा उत्पादन मिलेगा
    क्योंकि करेली की ऐसी फसल है ,जो ज्यादा
    खाद चाहती है ज्यादा देखभाल चाहती है तो
    जिसना जितना जवांस तत्व ज्यादा होगा उतना
    इसका जड़ का विकास अच्छा होता है आपको
    अच्छी पैदावार मिलती है ,जहां तक किस्मों
    का सवाल है ,किस्में बहुत ही महत्त्वपूर्ण
    है !
  4.         और किस्में जब अच्छी होती है तो आपका
    आधा काम समाधान हो जाता है ,आपके आधी
    समस्या का समाधान हो जाता है ,क्योंकि
    अच्छी किस्म से हमेशा आपको अच्छी ही
    पैदावार मिलेगी जब किस्म की बात आती है तो
    किस्मों में पूसा विशेष भारतीय किसम
    संस्थान पोषण निद से निकली हुई किस्म है!
    इसकी जो पैदावार है बहुत अच्छी है और यह
    गर्मी के मौ समम में बहुत ही अच्छी आती है
    और इसको हम उत्तर भारत में भी करते हैं
    दक्षिण भारत में भी करते हैं ,मध्य भारत
    में भी करते हैं दूसरी महत्त्वपूर्ण किस्म
    है ,पूसा दो मौसमी इसका जैसे कि नाम ही
    लगता है ,दो मौसमी यानी कि दोनों मौसम
    गर्मी के मौसम में भी इसको ले सकते हैं ,औरखरीफ के मौसम में भी ले सकते हैं ,पूसा दो
    मौसमी बहुत अच्छी किस्म है इसका भी
    उत्पादन काफी बड़े एरिया में होता है और
    उत्तर भारत में और दक्षिण भारत में भी
    इसकी क्या काफी अच्छी पैदावार ली जा सकती
    है ,तीसरी जो किस्म है बीजे 14 यानी कि
    बीजे 14 ये भी किस्म काफी इससे काफी अच्छी
    पैदावार मिल सकती है ,चौथी किस्म है प्रीति
    यह भी काफी अच्छी किस्म है इसकी जो
    पैदावार है मध्य भारत में काफी होती है
    इसकी भी पैदावार अी ली जा सकती है!
  5.          जब बीज उपचार की
    बात आती है तो दोनों ही बातें हैं ,कि इसको
    आपको फमू नाशक दवाई से उपचारित करना है और
    साथ ही साथ में जीवाणु खाद क्योंकि जीवाणु
    खाद जो है ,हमारे दोस्त है ,जितने भी हम
    जीवाणु खाद का प्रयोग करते हैं ,इससे हमारी
    मिट्टी अच्छी हो जाती है ,कम लागत में
    हमारे पौधों को अच्छे पौषक तत्व मिल जाते
    हैं ,और साथ-साथ में हमारी जेब पर भी जोर
    कम पड़ता है तो जीवाणु खाद से भी उपचारित
    करना है ,और इसको साथ-साथ में फफू नाशक
    दवाई से भी उपचारित करना है ,जब उपचार की
    बात आती है ,तो सबसे पहले फफू नाशक दवाई से
    उपचारित होगा !

  •           जब बीज सूख जाएगा उपचार करने
    के बाद में तब जीवाणु खाद से उपचार होगा
    और जीवाणु खाद से उपचार करने का सही तरीका
    यह है ,कि आप लगभग आधा से एक लीटर पानी ले
    उसमें 50 से 100 ग्राम गुड़ इस पानी को
    उबाल ले गुड़ के साथ में जब पानी खूब उबल
    जाए इसको ठंडा कर ले ठंडा होने के बाद में
    एक पैकेट पीएसबी इनके फास्फोरस बैक्टीरिया
    दूसरा पैकेट एजोट फैक्टर इन दोनों जीवाणु
    खादों को अच्छी तरह से इस पानी में मिला
    लें अब इस पूरे पानी को एक एकड़ के बीज प
    उपचारित कर दें अच्छी तरह से बीज में इसको
    रब कर दें मिला दें !जिससे पूरे बीज पे इस
    जीवाणु खाद का आवरण आ जाए अब इस बीज को आप
    छाया में सुखाए और सूखने के बाद इसकी रपाई
    करेंगे ई का जो सही तरीका है वो ये इनको
    भी मेड पर ही लगाना चाहिए !
          इनी कि उठी हुई
    क्यारी में लगभग 1 मीटर चौड़ी आप क्यारी
    बनाए उसकी दोनों तरफ लगा सकते हैं ,और बीच
    से बीच की जो दूरी है वह 1 फीट रख सकते
    हैं ?और जहां पर भी लगा रहे हैं !वहां पे जो
    आप देसी खाद का प्रयोग तो किया ही किया है !
    मिट्टी की जांच के अनुसार अन्य पौषक
    तत्त्वों का भी इस्तेमाल होना बहुत जरूरी
    है ,क्योंकि यह फसल जो है पूरी जिंदगी कुछ
    ना कुछ इनको खाद चाहिए और सही मात्रा में
    जब खाद मिलता है तभी अच्छी पैदावार दे
    पाती है ,तो अगर आपने उपचार मिट्टी की जांच
    नहीं करवाई है ,तो
    लगभग 30 से किलो
    नाइट्रोजन 30 से 40 किलो फास्फोरस 30 से
    40 किलो पोटाश इनको बवाई से पहले डाल दें
    और जो बाकी खाद है ,नाइट्रोजन की मात्रा है
    उसको दो स्प्लिट डोज में एक ज फसल एक
    महीने के आसपास हो जाए एक जब फसल 55 से 60
    दिन पे आ जाए तब आपको उसको देना चाहिए और
    यह खाद देते हैं ,तो हमें बड़ी अच्छी
    पैदावार मिलती है ,दवाई का छिड़काव कम से
    कम करना है ,और आपको बाकी देखभाल ज्यादा कर
    रखनी है ,क्योंकि अगर आप दवाई का छिड़काव
    करते हैं ,तो मधुमित्र दवा का असर सबसे
    ज्यादा पड़ता है ,और मधुमक्खी अगर आपकी
    खत्म हो जाती है तो आपका जो प्रगण की
    क्रिया है ,वो नहीं हो पाती है ,और परागण की
    क्रिया नहीं होती है ,तो फल नहीं बनते हैं !तो बहुत इस बात का ध्यान रखना है अगर आपके
    खेत में कीड़ा बीमारी का प्रकोप हो तो
    विशेषज्ञ की राय के अनुसार ही इस प्रकार
    से छिड़काव करना है कि मधुमक्खियों को कोई
    प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े जब आपकी फसल में
    फल लगने लग जाएं तो समय-समय पर तोड़ाई
    करनी है ,क्योंकि अगर फल समय पर नहीं तोड़ा
    गया तो फल बड़ा हो जाता है खराब भी हो
    जाता है ,और वो बाजार में अच्छे पैसे भी
    नहीं मिल पाते हैं ,तो अच्छा पैसा लेने के
    लिए सही समय पर तोड़ाई करना बहुत जरूरी है
    तो अगर आप इन सब बातों का ध्यान रखेंगे तो
    आपको करेले से बहुत अच्छी पैदावार मिलेगी
    और मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे किसान
    भाई इन सब बातों का ध्यान रखते हुए अच्छी
    पैदावार लेंगे और अच्छा पैसा कमाए!
  • धन्यवाद खेती करे
  • Khetikare
  • Thank You

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